नई कविता ka sampurn gyan – नयी कविता

नई कविता प्रयोगवाद का विकास ही कालांतर में ‘नई कविता” के रूप में हुआ। वस्तुतः प्रयोगवाद और नई कविता में कोई सीमा रेखा नहीं खींची जा सकती | बहुत से कवि जो पहले प्रयोगवादी रहे, बाद में नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर बन गए। इस प्रकार ये दोनों एक ही काव्यधारा के विकास की दो … Read more